Share market में Technical Analysis क्या है। Technical एनालिसिस हिंदी में समझें

 दोस्तों mystical Finance ब्लॉग में आप सभी का स्वागत है। आज के इस लेख में हम जानेंगे कि शेयर मार्केट में technical एनालिसिस क्या होता है। क्योंकि टेक्निकल एनालिसिस शेयर बाजार में बहुत महत्वपूर्ण होता है और अभी निवेशकों को इसकी समझ होनी चाहिए। अगर आपको जानना है कि शेयर मार्केट में टेक्निकल एनालिसिस क्या होता है और टेक्निकल एनालिसिस कैसे किया जाता है। तो आज का यह लेख पूरा ध्यान से जरूर पढ़ें। इस लेख में हमने आपको टेक्निकल एनालिसिस करने का सही तरीका और टेक्निकल एनालिसिस के बारे में सारी बातें आसान हिंदी भाषा में बताई हुई  हैं।


शेयर बाजार में जितने भी नए लोग आते हैं उनमें से ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि technical analysis बहुत ज्यादा कठिन है और इसे करने के लिए चार्ट पैटर्न और finance की समझ होनी चाहिए या तो ca या accountant की डिग्री होनी चाहिए। परंतु में आपको बता दूं जैसा आप लोग समझते हो ऐसा बिलकुल भी नहीं है। यदि आप आज के इस लेख को पूरा पड़ते हैं और समझते हैं तो आप आसानी से शेयर बाजार में टेक्निकल एनालिसिस कर सकते हैं।


Share market में Technical Analysis क्या है। Technical एनालिसिस हिंदी में समझें


(Toc)


Share market में Technical Analysis 

यदि आपको लगता है कि Technical Analysis बहुत कठिन है तो सबसे पहले अपने मन से यह बात निकाल लीजिए, क्योंकि Technical Analysis करने के लिए आपको सिर्फ कुछ गणित और बिजनेस की समझ होनी चाहिए जिससे आप आसानी से शेयर बाजार में technical analysis कर सकते हैं।


Share Market में Technical Analysis क्या होता है।

Technical Analysis  शेयर बाजार का एक महत्वपूर्ण टूल होता है, जिसका उपयोग निवेशक market के मूवमेंट को समझने के लिए उपयोग करते हैं। Technical Analysis में chart और price को देखकर यह पता लगाया जाता है कि क्या यह सही समय है इस शेयर को खरीदने का, या नहीं। Technical Analysis के जरिए निवेशक मार्केट में यह पता लगाते हैं कि अभी किस trade या share को खरीदना है और किस समय पर बेचना है।

Technical Analysis में मुख्य रूप से chart को देखकर एक अनुमान लगाया जाता है कि इसके बाद शेयर में किस तरफ मूवमेंट आएगा इसके आधार पर ट्रेड या निवेश किया जाता है। यह शेयर के प्राइस और वॉल्यूम से मिलकर बना होता है। Technical Analysis के जरिए ट्रेडिंग वॉल्यूम और शेयर के प्राइस में आने वाले अंतर को समझना आसान होता है। Technical Analysis से हम पता लगाते है कि:


  • शेयर या ट्रेड कब खरीदना है।
  • शेयर या ट्रेड कब बेचना है।
  • शेयर या ट्रेड को कब तक अपने पास होल्ड करके रखना है।


Trend Analysis in technical analysis

यह technical Analysis का ही एक पार्ट है जहां पर शेयर में हो रहे मूवमेंट के आधार पे एक Trend की पहचान करी जाती है और उसके आधार पर आगे शेयर के प्राइस के बढ़ने या घटने का अनुमान लगाया जाता है।
शेयर  बाजार में तीन प्रकार का ट्रेंड पाया जाता है।


1. UpTrend
2. Down Trend
3. SideWays Trend


चलिए अब इन तीनों के बारे में जानते है और साथ ही यह पता लगाते हैं कि Trend के आधार पर कैसे मार्केट में काम किया जाता है। और कैसे Trend के द्वारा आगे होने वाले  मूवमेंट का पता लगाया जाता है।


UpTrend

UpTrend एक बुलिश ट्रेंड है। जब शेयर का भाव लगातार बढ़ता जाता है तब चार्ट में UpTrend बनता है। इसमें शेयर की प्राइस लगातार बढ़ती है और एक नया higher high और एक नया higher low बनाती जाती है। नीचे चित्र के जरिए आप देख सकते हैं कि Uptrend चार्ट में कैसे दिखता है।

Uptrend क्या होता है।


इसमें कैंडल हर बार एक नया high प्वाइंट बनाती है और शेयर की प्राइस लगातार बढ़ती है। Higher high का मतलब होता है शेयर की जो पहले प्राइस थी उससे ऊपर एक नया कैंडल बनता है। और higher low का मतलब होता है कि पिछली कैंडल के ऊपर या पहले की प्राइस से थोड़ा ऊपर नई कैंडल का क्लोज होना। यह higher high के नीचे बनती है।

जब कभी भी किसी शेयर में uptrend दिखता है इसका मतलब होता है कि उस शेयर की प्राइस लगातार बढ़ रही है।और वो शेयर अभी बुलिश है।


Down Trend

Down Trend एक बेयरिश ट्रेंड है। जब कभी किसी शेयर का भाव लगातार घटता जाता है तो उस शेयर के चार्ट पर Down Trend बनता है। इसमें शेयर की प्राइस लगातार घटती चली जाती है और एक नया lower low और एक नया lower high बनाती है। नीचे चित्र के माध्यम से आप देख सकते हैं कि Down Trend चार्ट में कैसा दिखता है।

Down Trend in share market। Technical analysis क्या है। Mysticalfinance.online


इसमें प्राइस हर बार एक नया low प्वाइंट बनाती है और शेयर के प्राइस लगातार घटती जाती है। Lower low का मतलब होता है शेयर की प्राइस अपने पिछले प्राइस से नीचे एक कैंडल या नई प्राइस बनती है जिससे शेयर की प्राइस घटती है। और lower high एक ऊपर की ओर बनती है परंतु यह पिछले lower low और low के बीच में बनता है जो पिछले lower low के थोड़ा ऊपर आकर क्लोज हो जाता है।

जब शेयर की प्राइस Down Trend में होती है इसका मतलब होता है कि शेयर की प्राइस लगातार घट रही है। और वो शेयर अभी बेयरिश है।


Side Ways Trend

यह एक ट्रेंड है जो कई बार चार्ट पर देखने को मिलता है  इसमें शेयर की प्राइस एक जोन में घूमती रहती है। Side Ways Trend में न तो शेयर की प्राइस बढ़ती है और न ही काम होती है। इसे चित्र के माध्यम से आप समझ सकते है कि चार्ट पर यह कैसा देखता है।



Side Ways Trend में प्राइस एक जोन में ही रहती है कभी वो ऊपर की ओर दिखती है तो कभी नीचे। पर वो एक जोन में आगे बढ़ती रहती है। जब भी किसी चार्ट में side ways trend बनता है ऐसे में ट्रेड लेने से बचना चाहिए और buy नही करना चाहिए। क्योंकि इसमें नुकसान होने के ज्यादा संभावना होती है ट्रेडर को कभी भी sideways मार्केट में buy की पोजिशन नही बनानी चाहिए।


Chart Analysis

Chart analysis, technical analysis का ही एक महत्वपूर्ण चरण है। यदि आप chart को पढ़ना सीख जाते हैं तो इसके जरिए आप आसानी से technical Analysis कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको chart को analysis करना भी आएगा तो आप शेयर बाजार में टेक्निकल एनालिसिस नही कर पाएंगे। तो चलिए जानते हैं चार्ट को पढ़ना।

Chart को पड़ने के लिए सबसे पहले आप को जानना होगा कि चार्ट कितने प्रकार के होते हैं और चार्ट कैसे काम करते हैं। चार्ट एक माध्यम होता है जिसके जरिए हम यह पता करते है कि मार्केट में अभी क्या चल रहा है यानी मार्केट में कैसा मूवमेंट आ रहा है। जिससे हम आगे मार्केट के बारे में अनुमान लगाते हैं कि इसके बाद मार्केट में किस तरफ और कितना मूव आ सकता है। तो चलिए जानते हैं चार्ट के बारे में सारी बातें।


चार्ट कितने प्रकार के होते हैं?

वैसे तो शेयर बाजार में कई प्रकार के चार्ट उपलब्ध हैं लेकिन हमने यहां पर कुछ महत्वपूर्ण और सबसे ज्यादा उपयोग होने वाले चार्ट के बारे में बताया हुआ है। जिनको सीख कर आप आसानी से चार्ट और प्राइस को समझ सकंगे और किसी भी शेयर के लिए technicl analysis कर पाएंगे। सबसे ज्यादा उपयोग होने वाले चार्ट और उनको उपयोग कैसे करना है चलिए समझते हैं।

  • Bar chart
  • Candel stick chart
  • Line chart
  • Heikln ashi
यह चारों चार्ट के प्रकार शेयर बाजार में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाले चार्ट के प्रकार है, और लगभग 100 में से 90 ट्रेडर और निवेशक इन्हीं चार्ट का उपयोग करते है किसी भी शेयर की प्राइस देखने के लिए।


Chart कैसे काम करते हैं?

चार्ट हमको किसी भी शेयर की प्राइस में होने वाले मूवमेंट को एक पैटर्न के द्वारा दिखाते हैं जिसको चार्ट पैटर्न कहा जाता है। जब भी शेयर की प्राइस में कोई भी मूवमेंट आती है तो चार्ट पर एक नई कैंडल या लाइन प्राइस के हिसाब से बनती है। जो कि अलग अलग प्रकार के चार्ट पर अलग अलग रूप से देखता है। चार्ट में time frame होते हैं। जिसमे अलग अलग टाइम frame में अलग अलग प्राइस के हिसाब से लाइन या कैंडल बनती है। चार्ट मुख्य रूप से हमको शेयर के प्राइस में होने वाले मूवमेंट के अनुसार अलग-अलग पैटर्न दिखता है।

Time Frame 

प्रत्येक चार्ट में हम खुद से time frame को सेट कर सकते है। उदाहरण के लिए हमने यदि चार्ट पैटर्न cnadelstick chart लिए है और time frame 5 मिनट का; ऐसे में चार्ट हमको 5 मिनट में शेयर के प्राइस में होने वाले मूवमेंट को एक कैंडल के रूप में दिखता है। यानी यदि शेयर का प्राइस बढ़ता है इस 5 मिनट के समय अंतराल में तो चार्ट पर हमको एक हरे रंग की candel देखने को मिलती है। वहीं अगर शेयर की प्राइस घटती है तो ये कैंडल लाल रंग की बनती है।

Time frame से यह पता लगता है कि एक फिक्स time में शेयर के भाव में क्या परिवर्तन आया हुआ है। जिसे चार्ट हमको दिखता हैं। Time frame का मतलब होता है यदि एक हमने किसी शेयर के लिए time फ्रेम 1 में का छाटा हुआ होता है तो वो यह दिखाता है की इस एक मिनट में शेयर के भाव में क्या परिवर्तन आया। जिसके आधार पर चार्ट एक कैंडल का निर्माण करता है। चार्ट प्रत्येक time frame के अनुसार अलग अलग कैंडल का निर्माण करता हैं

Trend Line

ट्रेंड लाइन एक ऐसी लाइन होती है जिसका उपयोग ट्रेंड को ढूढने के लिए उपयोग किया जाता है। Trend Line के जरिए हम एक ट्रेंड को मार्क करने के लिए उपयोग में लाया जाता है। Trend Line चार्ट पर उपयोग होने वाली एक सीधी रेखा होती है।जिसका प्रयोग किसी शेयर या फाइनेंशियल इस्ट्रूमेंट में आती मूवमेंट की दिशा को पता लगाने में किया जाता हैं। Trend Line निवेशकों को प्राइस मूवमेंट को एनालाइज करने में मदद करती है। Trend Line के जरिए ट्रेडर चार्ट में ट्रेंड की पहचान करते हैं और उसके जरिए एक सही एंट्री और exit प्वाइंट का पता लगाते हैं और अपना डिसीजन लेते हैं।

Demand & Supply In share market

टेक्निकल एनालिसिस में डिमांड एंड सप्लाई एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिसके जरिए मार्केट में होने वाले मूवमेंट के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। डिमांड और सप्लाई बाजार में प्रोडक्ट और sevices की मांग और उपलब्धता को समझने में मदद करता है। डिमांड और सप्लाई के मेल से बाजार में मूल्य स्थिर रहता है। जब डिमांड बढ़ती है तो बाजार में उस वस्तु का भाव (price) बढ़ता है। जबकि सप्लाई बढ़ने में उस वस्तु की प्राइस घट जाती है।

डिमांड और सप्लाई को समझकर बाजार में काम करने से व्यापार करने में मदद मिलती है। क्योंकि इसके द्वारा बाजार में pricing, Stretegies, Inventory mangement और production जैसी कई सारी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाया जा सकता है।


Breakout In share Market

जब लगातार किसी शेयर की प्राइस एक जोन में मूव करती रहती है और एकदम से प्राइस फटकर एक और जाने लगती है तो इसे ब्रेकआउट कहा जाता है। एक जोन से हटकर मार्केट एक तरफ एक नया ट्रेंड बनाती है और एक दिशा में मूवमेंट दिखाती है। एकदम से जब मार्केट में कोई न्यूज़ आती है तो यह ब्रेकआउट बनाती है वो ब्रेकआउट नीचे या ऊपर किसी भी तरफ हो सकता है। 

किसी कारण या न्यूज और डिमांड सप्लाई के चेंज होने से मार्केट में आचनक से एक तरफ को मूव आता है और मार्केट उस तरफ बढ़ता जाता है जिसे ब्रेकआउट कहते हैं।


यह भी समझें - शेयर बाजार में फंडामेंटल analysis क्या होती है। Fundamental analysis in hindi


Support And Resistant



Technical Analysis का महत्व

Technical Analysis का एक ट्रेडर के लिए बहुत ज्यादा महत्व होता है। Technical analysis इसलिए महावपूर्ण होता है क्योंकि इसके बिना शेयर में निवेश करने से नुकसान होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। परंतु वही यदि कोई व्यक्ति पूरी तरीके से Technical Analysis करके निवेश करता है तो उसके प्रॉफिट होने के चांस बढ़ जाते हैं। परंतु सिर्फ टेक्निकल एनालिसिस ही निवेश के लिए काफी नही है साथ ही साथ अन्य चीजे भी शेयर बाजार में काम करती हैं।

कुछ technical analysis के महत्व :-

मार्केट मूवमेंट का पूर्वानुमान- टेक्निकल एनालिसिस के जरिए ट्रेडर पहले से ही अपनी एनालिसिस के जरिए आगे होने वाले मूवमेंट के बारे में आसानी से पता लगा सकते हैं। और पूर्वानुमान लगाते हैं।

ट्रेंड की पहचान- टेक्निकल एनालिसिस से मार्केट के मूवमेंट के आधार पर मार्केट में चल रहे ट्रेंड के बारे में पता लगाया जाता है।

Entry और Exit प्वाइंट का निर्धारण- टेक्निकल एनालिसिस के जरिए एक ट्रेडर शेयर मार्केट में एक शेयर को कब खरीदना है और कब बेचना है, इसका पता लगाता है।

Dicision Making- टेक्निकल एनालिसिस के निवेशक या ट्रेडर अपना यह डिसीजन लेते हैं कि कब तक किस शेयर को अपने पास होल्ड करके रखना है और कितने समय बाद उस शेयर को बेचना है।

Market psycology- टेक्निकल एनालिसिस मार्केट की साइकोलॉजी को समझने में मदद करती है। मार्केट में चल रहे प्राइस के आधार पर ट्रेडर मार्केट का behaviour और ट्रेंड का एनालिसिस करता है। मार्केट साइकोलॉजी के मतलब है ट्रेडर के sentiment,behaviour और मार्केट के प्रति expectation।


इस लेख को सिर्फ और सिर्फ शिक्षण के उद्देश्य से लिखा हुआ है। यदि आप इस लेख को पढ़कर बिना शेयर बाजार को सीखे और समझे, शेयर बाजार में निवेश करते हैं और आपका कोई नुकसान होता है। तो इसकी mystical finance कोई भी जिम्मेदारी नही लेता है। हम कोई रियर्च एनालिस्ट नही हैं। शेयर बाजार में निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से जरूर संपर्क करें।(alert-warning)

निष्कर्ष

इस लेख के माध्यम से आपने जाना कि शेयर मार्केट में टेक्निकल एनालिसिस क्या होती हैं। Technical analysis एक महत्वपूर्ण उपकरण है जो निवेशकों को शेयर बाजार में होने वाली गतिविधियों और शेयर के मूवमेंट को समझने में मदद करती है। हम आशा करते है कि इस लेख को पढ़ने के बाद आप technical Analysis अच्छे से समझ गए होंगे।इस लेख में हमने आपको Technical Analysis क्या है और technical Analysis कैसे की जाती है। इसे  आसान हिंदी भाषा में समझाने की कोशिश की हुई है ताकि आप अपने शेयर बाजार और फाइनेंस के ज्ञान को बढ़ा सकें।

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